जब हिंदी मनोरंजन की बात आती है, तो सबसे ताकतवर 'माँ-बेटी' की कहानी हमें 'मॉम' (श्रीदेवी अभिनीत) में देखने को मिलती है। फिल्म में माँ अपनी सौतेली बेटी को बचाने के लिए अपनी अंतर्वासना (आंतरिक वासना) यानी क्रोध और न्याय की भावना को जगाती है। यह भूख शारीरिक नहीं, बल्कि 'अपनी संतान को खोने का डर' है।
इसी तरह, रियल लाइफ में एक कहानी मेरे सामने आई:
प्रिया (38 साल, दिल्ली की एक मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव) और उसकी 16 साल की बेटी अनन्या।
प्रिया को थिरकते हुए डांस करना बहुत पसंद था, लेकिन पितृसत्तात्मक परिवार में उन्हें यह शौक पूरा नहीं करने दिया गया। अब वह अपनी बेटी अनन्या को डांस क्लास भेजती हैं, लेकिन उस हद तक नहीं जहाँ अनन्या 'इंस्टाग्राम रील्स' बना सके। यही अंतर्वासना का संघर्ष है – माँ के अंदर की जलन यह देखते हुए कि उसकी बेटी को वह आज़ादी मिल गई, जो खुद को कभी नहीं मिली। mom with daughter story antarvasna hindi hot
शेखर कपूर की इस वेब सीरीज़ में निर्णायक अधिकारी वर्तिका चतुर्वेदी (शेफाली शाह) अपनी बेटी के साथ संवादों में अनजाने में ही सही, अपने काम के तनाव को लेकर कटुता दिखाती हैं। यह भावनात्मक अंतर्वासना है – अपने दर्द को दूसरे पर थोपना, खासकर सबसे करीबी पर।
एक सच्ची कहानी: रुचि (45, गृहिणी, मुंबई) अक्सर अपनी बेटी नेहा (22, सॉफ्टवेर इंजीनियर) से कहती थी, "तुम्हारी नौकरी बस कुछ साल चलेगी, फिर तुम्हें ब्याह के पीछे पड़ना पड़ेगा।" नेहा को यह बात चुभती थी। बाद में पता चला कि रुचि खुद एक कुशल चित्रकार थीं, जिन्हें शादी के बाद झाड़ू-पोछा ही मुकद्दर मिला। उनके अंदर की अंतर्वासना रोज़ एक ना एक टोकन के रूप में बाहर आती थी।
अगर आप भी एक माँ हैं या बेटी हैं, और चाहती हैं कि आपकी 'मोम विद डॉटर स्टोरी' दुखांत न हो, बल्कि प्रेरणादायक हो, तो इन 5 हिंदी लाइफस्टाइल हैबिट्स को अपनाएँ: बल्कि प्रेरणादायक हो
"बेटा, ये जींस तुम्हें शोभा नहीं देती।"
"माँ, अब ये 90 का दशक नहीं चल रहा।"
यह संवाद आपने कई हिंदी सीरियल्स और फिल्मों में सुना होगा। लेकिन असल ज़िंदगी में यही बातें 'अंतर्वासना' का रूप ले लेती हैं। क्यों? क्योंकि हर माँ अपनी बेटी में अपना प्रतिबिंब देखना चाहती है, जबकि हर बेटी अपनी अलग पहचान बनाना चाहती है। यहाँ प्रवेश होता है 'अंतर्वासना' का मनोवैज्ञानिक पहलू – अपनी असफलताओं को बेटी से दूर रखना, और अपनी अधूरी इच्छाओं को बेटी के माध्यम से जीना। बल्कि मानसिक जटिलताओं
लेखिका: रिया शर्मा
परिवार, रिश्ते और हिंदी सिनेमा पर 10 साल का अनुभव
हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म और हिंदी साहित्य में एक शब्द ने लोगों का ध्यान खींचा है: "अंतर्वासना" (Antarvasna)। यह शब्द संस्कृत से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है 'आंतरिक इच्छा' या 'अंदर दबी हुई भावना'। अक्सर इसे गलत संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन आज हम बात करेंगे एक बेहद संवेदनशील विषय पर: एक माँ और बेटी के रिश्ते में अंतर्वासना।
यह केवल शारीरिक इच्छा नहीं, बल्कि मानसिक जटिलताओं, ईर्ष्या, समझ की कमी और साझा संघर्षों की कहानी है। आइए इस कहानी को तीन अध्यायों में समझते हैं, जहाँ जीवनशैली, हिंदी मनोरंजन और सामाजिक यथार्थ आपस में जुड़ते हैं।